गीतांजली पाण्डेय द्वारा लिखित, 17 साल की छात्रा

मुंबई एक सम्पन्न तथा विकसित महानगर है, इसे मायानगरी मुंबई के नाम से भी जाना जाता है । यहाँ बड़ी- बड़ी इमारतें, उन्नत परिवर्तन तथा सामाजिक – आर्थिक सुविधाएँ उपलब्ध हैं। इन्ही सुविधाओं से आकर्षित होकर बड़ी संख्या में लोग मुंबई आते हैं परन्तु मुंबई नगरी का एक दयनीय तथा दर्दनाक चेहरा, धारावी झुग्गी बस्ती में देखने को मिलता है। जहां लोग मूलभूत सुविधाओं के बिना ही जीवन जीते हैं। धारावी झुग्गी बस्ती एशिया की सबसे बड़ी झुग्गी बस्ती है। इस बस्ती की निम्नलिखित विशेताएँ हैं

भौतिक विशेषताएँ

धारावी बस्ती महाराष्ट्र राज्य की राजधानी मुंबई का एक क्षेत्र है। धारावी वस्तुतः सागर का एक हिस्सा है जो व्यापक रूप से कचरे से भरी गई जगह के ऊपर स्तिथ है। यह क्षेत्र पश्चिम में माहिम तथा पूर्व में सायन के बीच स्तिथ है । यह बस्ती 175 हेक्टेयर या 0.67 वर्ग मील के क्षेत्र में फैली हुई है। इस बस्ती की आबादी लगभग 15 लाख है। धारावी बस्ती के उत्तर में मीठी नदी बस्ती है जो अरब सागर में गिरती है ।

धारावी की समूची बस्ती अस्थायी निर्माण के भवन से बना है जो कि दो से तीन मंजिल ऊँची है उनमें जंग लगी लोहे की सीढ़ीयां ऊपर जाती हैं। यहाँ के कमरे में 10-12 व्यक्तियों को रहते देखा जा सकता है। धारावी बस्ती 12 मोहल्लों से मिलकर बनी है ।

जनसांख्यिकी विशेषताएँ

धारावी झुग्गी बस्ती की कुल वर्तमान आबादी अज्ञात है परन्तु अनुमान है कि इसकी आबादी 15 लाख के आसपास है । अब यह बस्ती 175 हेक्टेयर में फैल चुकी है जहां का जनसंख्या घनत्व लगभग 869,565 लोग प्रति वर्ग मील है । 69% साक्षारता दर के साथ, धारावी भारत में सबसे अधिक साक्षर झुग्गी है ।

धारावी झुग्गी बस्ती में रहने वाले 30% लोग मुस्लिम, 60% ईसाई तथा 63% हिन्दू हैं । इन लोगों में से 50% लोग तमिल हैं जो तेलुगू तथा मराठी भाषा बोलते हैं। 1960 के दशक में ग्रामीण क्षेत्र के उच्च वर्ग के जमींदारों के अत्याचारों के कारण तमिलनाडू के लोग मुंबई में प्रवास कर गए थे । तमिलनाडू के कुछ हिस्सों में आवर्ती की स्थिति ने भी उनके प्रवास में योगदान दिया।

सामाजिक एवं मौलिक विशेषताएँ

परिवहन सुविधाएँ: धारावी बस्ती में स्थायी सड़कों तथा परिवहन सुविधाओं का बहुत अभाव है। यहाँ की गलियाँ पगडंडियों की तरह सकरी होती है जहां वाहनों का चलना संभव नहीं है। इस गंदी बस्ती में केवल एक मुख्य सड़क है। इसे ‘नाइंटीफुट रोड’ के गलत नाम से जाना जाता है जो अपनी चौड़ाई में घटकर आधे से कम रह गई है ।

स्वच्छता सुविधाएँ: धारावी बस्ती में स्वच्छता सुविधाएँ अविकसित हैं। यहाँ 1,440 लोग एक शौचालय साझा करते हैं। बारिश के समय में यहाँ पर जन निकासी सुविधाएँ बिलकुल अवरुद्ध हो जाती हैं, सड़कों और नालों में अंतर करना मुश्किल हो जाता है । यहाँ चारों और कूड़े – कचरे के ढेर पड़े रहते हैं। यहाँ लोगों को शौचालय उपयोग करने के लिए रु 2-5 शुल्क देना पड़ता है। एक अध्ययन से पता चला है कि यहाँ कई लड़कियों को स्कूल जल्दी जाने के लिए मजबूर किया जाता है ताकि वे सामुदायिक शौचालय की जगह वहाँ शौचालय का उपयोग कर सकें ।

शिक्षा सुविधाएँ: धारावी में अधिकांश बच्चे स्कूल शुरू करते हैं परंतु कुछ ही पढ़ाई समाप्त कर पाते हैं  क्योंकि अक्सर बालश्रम क़ानूनों के बावजूद उनसे बालश्रम करवाया जाता है। ये बच्चे अपने परिवारों की आय बढ़ाने के लिए हानिकारक कंपनियों में कार्य करते हैं। यहाँ के लोगों में शिक्षा के प्रति जागरूकता का अभाव है ।

स्वास्थ्य सुविधाएँ: ऐसे तो मुंबई में स्वास्थ्य सुविधाएँ अत्यंत उन्नत है परन्तु धारावी अत्यंत उन्नत है परन्तु धारावी बस्ती में स्वास्थ्य सुविधाएँ का बहुत अभाव है। यहाँ स्वच्छता तथा जागरूकता के अभाव के कारण हैजा, मलेरिया तथा डायरिया जैसी बीमारियों का कहर फैला रहता है । यहाँ जनसंख्या की तुलना में अस्पताल, नर्सों तथा प्रशिक्षित डाक्टरों का बहुत अभाव है ।

आर्थिक विशेषताएँ

धारावी में पारंपरिक मिट्टी के बर्तनों और कपड़ा उद्योगों के अलावा, मुंबई के अन्य हिस्सों से रिसाइकल योग्य कचरे का प्रसंस्करण करने वाला एक बड़ा पुनर्चक्रण उद्योग भी है। धारावी में पुनर्चक्रण उद्योग से लगभग 250,000 लोग जुड़े हुए है जिले में अनुमानित 5000 व्यवसाय और 15,000 एक कमरे वाले कारखाने हैं। जहाँ से कसीदाकारी और जड़ी का काम, परिष्कृत चमड़े का काम, उच्च फैशन, वस्त्रादी, धातु का कार्य, उत्कृष्ट आभूषण सेट एवं फ़र्नीचर आदि दुनिया भर के घरों तक जाते है। दो प्रमुख उपनगरीय धारावी में आते है, जिससे यह लोगों के काम से आने जाने के लिए महतवपूर्ण स्टेशन बन जाता है।

निष्कर्ष

धारावी बस्ती में रहने वाले निवासियों को अनेक चुनीतियों तथा समस्याओं का सामना करना पड़ता है। यह बस्ती सभ्य तथा उन्नत नगर मुंबई का एक दयनीय तथा लाचारी से परिपूर्ण चेहरा प्रस्तुत करती है। महाराष्ट्र के राज्य सरकार ने स्लम सुधार परियोजना, स्लम उन्यन परियोजना, स्लम पुनर्वास परियोजना तथा धारावी पुनर्वास जैसी अनेक योजनाएँ चलाईं ताकि धारावी बस्ती को स्वच्छ बनाया जा सके परंतु इनमें से एक भी परियोजना स्फलतापूर्ण लागू नहीं हो पाई है। सरकार को धारावी बस्ती के सुधार तथा समस्याओं के समाधान के लिए नई योजनाएँ लानी चाहिए तथा उन्हे सफ़्ल्तपूर्ण लागू करना चाहिए। नागरिकों को भी जागरूक होकर सरकार तथा सरकारी योजनाओं का साथ देना चाहिए।