वंदना द्वारा लिखित, 20 साल छात्रा

जिसने भी कहा है बिल्कुल सही कहा है कि, उम्र कभी माएने नही रखती, वो सिर्फ नंबर का काम करती है। किसी को अगर कुछ हासिल करना है तो वो अपनी उम्र नही देखता। वो देखता है मुकाम जो उसे हासिल करना होता है कुछ ऐसा ही कर दिखाया है दिल्ली के नजफगढ़ देहात की रहने वाली 94 साल की भगवानी देवी डागर ने जिन्होंने फ़िनलैंड वर्ल्ड मास्टर्स एथलिटिक्स चैंपियनशिप में अपने हुनर से गोल्ड मैडल हासिल किया।

भगवानी देवी एक पैरा एथलीट है। उन्होंने ये कमाल 100 मीटर की दौड़ में दिखाया जिसमें उन्होंने उस दौड़ को 24.74 सेकंड में पूरा कर नेशनल रिकॉर्ड कायम किया। इस चैंपियनशिप में उन्होंने एक गोल्ड और दो कांस्य पदक भी अपने नाम किए। भगवानी देवी ने ना केवल रनिंग में कमाल दिखाया बल्कि गोला फेंक और डिसकस थ्रो में भी इतिहास रच दिया।

परिचय

भगवानी देवी डागर का जन्म साल 1928 को हरियाणा के एक छोटे से गाँव सिड़का में हुआ। जहां पर उन्होंने अपना पूरा बचपन बिताया। वहीं एक स्कूल में उन्होंने शिक्षा प्राप्त की। भगवानी देवी डागर ज्यादा पढ़ी लिखी नहीं है। ऐसा इसीलिए क्योंकि उनके माता पिता ने छोटी उम्र में ही उनकी शादी कर दी थी। उनके पति 63 साल पहले गुजर गए थे। जिसके बाद वो अपने बेटे हवा सिंह डागर के साथ अकेले रहती थी। अकेले रहकर ही उन्होंने अपने बेटे की परवरिश की लेकिन कभी हार नही मानी।

भगवानी देवी डागर और उनका परिवार

भगवानी देवी डागर का जीवन परिचय
छवि स्रोत: aajtak.in

भगवानी देवी डागर के पति ने बहुत पहले ही उनका साथ छोड़ दिया था लेकिन उनके बेटे ने अपनी माँ को संभाला। उनके परिवार में अब उनके बेटे-बहू, उनके पोता-पोती, परपोते आदि सब हैं। ऐसे में वो अपनी दादी को ऐसे मुक़ाम पर देखकर काफी ख़ुश दिखाई देते हैं और गौरान्वित महसूस किया करते हैं।

भगवानी देवी की ट्रेनिंग

भगवानी देवी सुबह 5 बजे उठकर रनिंग की प्रैक्टिस किया करती थीं। उसके बाद शाम को भी वही रूटीन फॉलो किया करती थीं। ऐसे ही प्रैक्टिस करते करते उन्होंने अपने आपको चैंपियनशिप के लिए तैयार किया जिसके बाद उन्होंने ज़ोन लेवल से शुरू करके नेशनल लेवल और अब अंतरराष्ट्रीय लेवल के लिए खेला। जिसमें उन्होंने जीत हासिल की और रिकॉर्ड में अपना नाम दर्ज कराया। उनके पोते विकास डागर ने उन्हें खेल की ओर प्रेरित किया और अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता में शामिल होने के लिए ट्रेनिंग दी। भगवानी देवी पिछले एक साल से फिनलैंड में होने वाली चैंपियनशिप के लिए तैयारी कर रही थीं। वह रोजाना सुबह 5 बजे उठकर दौड़ लगाने जाती, शाम में फिर रनिंग पर जाया करती थीं।

भगवानी देवी कैसे बनी एथलीट

हरियाणा की रहने वाली भगवानी देवी के एथलीट बनने की कहानी बहुत रोचक है। भगवानी देवी के पोते विकास डागर एक अंतरराष्ट्रीय पैरा एथलीट हैं और राजीव गांधी स्पोर्ट्स पुरस्कार से सम्मानित हैं। विकास डागर की दादी भी एक साधारण सी गृहिणी हैं, जिनका जीवन पति के देहान्त के बाद बेटे और परिवार को संभालने में गुज़रा। वह खेतों में भी काम किया करती थीं। उनके पोते ने ही चैंपियनशिप के लिए प्रेरित किया।

भगवानी देवी डागर और नेशनल चैंपियनशिप

भगवानी देवी डागर ने इससे पहले भी एक चैंपियनशिप में हिस्सा लिया था जिसमें उन्होंने 100 मीटर की एक रेस में हिस्सा लिया था लेकिन इस बार उन्होंने विश्व रिकॉर्ड तोड़ने के लिए रेस लगाई लेकिन कुछ चंद सेकंड के कारण ये नहीं हो पाया। जिसके कारण वो विश्व रिकॉर्ड तो नहीं तोड़ पाई लेकिन नेशनल रिकॉर्ड तोड़ने में कामयाब रहीं। इसके लिए उनके पोते ने उन्हें खूब प्रेरित किया।

भगवानी देवी ने रचा इतिहास

फ़िनलैंड में आयोजित वर्ल्ड मास्टर्स एथलेटिक्स चैंपियनशिप में गोल्ड मैडल जीतकर नजफगढ़ की 94 वर्षीय भगवानी देवी ने देश का नाम गर्व से ऊंचा कर दिखाया है। 100 मीटर दौड़ में उन्होंने गोल्ड मैडल और डिस्कस थ्रो में ब्रॉन्ज़ मैडल जीतकर उन्होंने इतिहास रच दिया है। एयरपोर्ट पर वापसी के बाद उनकी झूमती हुई तसवीर सोशल मीडिया पर वायरल है। 100 मीटर दौड़ उन्होंने महज 24.74 सेकंड में पूरी की जो राष्ट्रीय रिकॉर्ड है। इस विश्व चैंपियनशिप में उन्होंने कुल एक गोल्ड और दो ब्रॉन्ज़ हासिल किए हैं। खेलों में उनका हर कदम पर साथ देने वाले उनके पोते विकास डागर ने बताया कि उनके यहाँ तक पहुँचने का सफर काफ़ी मुश्किल भरा था। विकास खुद भी एक अंतरराष्ट्रीय पैरा एथलीट हैं।

भगवानी देवी की सफलता

भगवानी देवी डागर ने अभी तक एक गोल्ड और दो ब्रॉन्ज मैडल हासिल किए हैं। इसके अलावा उन्होंने दिल्ली स्टेट में 3 गोल्ड और चेन्नई नेशनल में 3 गोल्ड मैडल भी हासिल किए हैं जिसकी चर्चाएं आजकल हर जगह हो रही हैं।

आशा है आपको भगवानी देवी डागर की कहानी जानकर अच्छा लगा होगा और सीखने को मिला होगा कि जब वह इतनी बुजुर्ग होकर यह कमाल कर सकती है, तो हम और आप क्यों नहीं। इसीलिए अपने जीवन में मेहनत और दृढ़ निश्चय के साथ प्रयास करते रहिए सफलता आपको जरूर मिलेगी।

हम इसी प्रकार की अन्य प्रेरणा और प्रोत्साहना से भरी हुई कहानियां लेकर आते रहेंगे।

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