प्रिया द्वारा लिखित

कोरोना वाइरस महामारी ने सभी देशों की अर्थव्यसथाओं को प्रभावित किया है तथा भारत की अर्थव्यवस्था भी इस से प्रभावित रही है ।

कोरोना वाइरस का आयात पर प्रभाव

कोरोना वाइरस से हवाई यात्रा, शेर बाज़ार, वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं सहित लगभग सभी क्षेत्र प्रभावित हो रहे हैं। यह वाइरस अमेरिकी अर्थव्यवस्था को बुरी तरह प्रभावित कर सकता है जबकि इसके कारण चीनी अर्थव्यवस्था पहले से ही मुश्किल स्थिति में है। इन दो अर्थव्यवस्थायों, जिन्हे वैश्विक इंजन के रूप में जाना जाता है, सम्पूर्ण वैश्विक अर्थव्यवस्था में सुस्ती तथा आगे जाकर मंदी का कारण बन सकता है ।

अमेरिका पर प्रभाव

निवेशकों के बाज़ारों से बाहर निकालने के कारण शेयर बाज़ार सूचकांक में लगातार गिरावट आई है । लोग बड़ी राशि के मुक़ाबले में सुरक्षित क्षेत्र जैसे – ‘सरकारी ब्रांड’ में लगा रहे है जिस से कीमतों में तेजी तथा उत्पादकता में कमी देखी गई है ।

अमेरिकी बाज़ार में वर्ष 2008 के वैश्विक वित्तीय संकट के बाद सबसे ख़राब अनुभव हाल ही में कोरोना वाइरस के कारण महसूस किया गया, ध्यान देने योग्य बात यह है कि अमेरिकी बाजरा में 12% से अधिक की गिरावट आ गई है । एप्पल, एडीडास जैसी कंपनियाँ इस से अधिक प्रभावित हो सकती हैं क्योंकि ये चीन के आशर्तिकर्ताओं पर निर्भर हैं, इन्हे भविष्य में बाधाओं का सामना करना पड़ सकता है ।

भारत की अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक प्रभाव

यह समस्या न केवल आपूर्ति श्रृंखला को प्रभावित करेगी बल्कि भारत के फार्मास्यूटिकल, एलेक्ट्रोनिक, ऑटोमोबाइल जैसे उद्धयोगों को गंभीर रूप से प्रभावित करेगी । निर्यात, जिसे अर्थव्यवस्था के विकास का इंजन माना जाता है, इसमें वैश्विक मंदी की स्थिति में और गिरावट आ सकती है ।

सकारात्मक पक्ष

भारतीय कंपनियाँ चीन आधारित ‘वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला’ में शामिल प्रमुख भागीदार नहीं है, अतः भारतीय कंपनियाँ इस से अधिक प्रभावित नहीं होंगी । कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट आ रही है, जो कि व्रहद अर्थव्यवस्था और मुद्रास्फीति के चलते अच्छी खबर है ।

रोजगार पर असर

भारत के द्रष्टिकोण से बात करें तो ‘सेंटर फॉर मोनिट्रिंग इंडियन इकोनोमी (सीएमआईई) के जारी आकड़ों के अनुसार, लॉकडाउन की वजह से कुल 12 करोड़ नौकरियाँ चली गईं हैं । कोरोना संकट के पहले भारत में कुल रोजगार की संख्या 40.4 करोड़ थी जो इस संकट के समय में 28.5 करोड़ हो चुकी है ।

फिलहाल, WHO की माने तो कोविड-19 के संकट का अभी सबसे बुरा दौर आना बाकी है । यानि कि आज यह निष्कर्ष निकालना कठिन है कि अर्थव्यवस्था का सबसे बुरा दौर क्या होने वाला है ? हम अभी सिर्फ संभावनाएँ जता सकते हैं ।

यह एक नई समस्या

इन सभी समस्याओं के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था में “रिवर्स माइग्रेशन’ को भी देखा जा रहा है । अभी यह देश के भीतर हो रहा है जहां लोग शहरों से वापस गाँव कि तरफ लौट रहे हैं । उदाहरण के रूप में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने अमेरिका में इमीग्रेशन रोकने के प्रस्ताव पर हस्ताक्षर कर दिए । अब आने वाले कुछ दिनों तक अमेरिका में किसी बाहरी व्यक्ति को रोजगार के अवसर प्राप्त नहीं होंगे ।

एशिया की अर्थव्यवस्था पर प्रभाव

एशियन डेव्लपमेंट बैंक में मार्च से पहले हफ्ते में जारी प्रेस रिलीज में यह कहा गया है कि कोरोना का विकासशील एशियाई अर्थव्यवस्था पर व्यापक असर होगा। अनुमान लगाया गया है कि कोरोना से दुनिया कि अर्थव्यवस्था को 77 बिलयन डॉलर से 347 बिलयन तक यानि वैश्विक जी.डी.पी का 0.1% से 0.5% तक का नुकसान हो सकता है ।

असल में मौजूदा हालात बहुत मुश्किल है । कोरोना वाइरस के आतंक के चलते पूरी दुनिया में प्रॉडक्शन का काम बंद है । जिससे निर्यात बुरी तरह प्रभावित हुआ है । यह सिर्फ एक आर्थिक परेशानी नहीं है बल्कि एक असली परेशानी है, जिससे सप्लाई और डिमांड बुरी तरह प्रभावित हुई है ।

हाल ही में होने वाले प्रमुख आयोजन रद्द किए गए हैं, उनमें से कुछ इस प्रकार हैं-

  • राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द ने राष्ट्रपति भवन में होने वाले होली मिलन कार्यक्रम रद्द कर दिए।
  • प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने भी अपना होली मिलन समारोह रद्द कर दिया।
  • पीएम मोदी ने बेल्जियम की यात्रा और यूरोपीय यूनियन के साथ होने वाला अपना शिखर सम्मेलन भी रोक दिया।
  • केंद्र और महाराष्ट्र की सरकारों ने ‘इंडिया फिनटेक फेस्टिवल’ को रोकने का निर्णय लिया ।
  • भारत की महिला टीम ने अपना चीन का दौरा रद्द कर दिया ।
  • शाओमि और रियलमी ने भारत में अपने उत्पाद का लांच रद्द कर दिया।

ज्वैलरी

एक और उद्योग जो कोरोना वाइरस के प्रकोप से प्रभावित है, वह है ज्वैलरी का कारोबार। कोरोना वाइरस से इस सैक्टर को करीब सवा अरब डॉलर का नुकसान होने की आशंका है ।

भारत के तराशे और पॉलिश किया हुए हीरों के निर्यात के सबसे बड़े केंद्र हाँग काँग हैं और इन दोनों ही जगहों पर वाइरस का बहुत बुरा असर पड़ा है ।